गुलाबी और सुनहरी ज़री के चमकदार मिश्रण से बुनी गई इस टिशू-युक्त कांचीपुरम सिल्क साड़ी में एक कोमल चमक पारंपरिक भव्यता से मिलती है। इसके शरीर पर सूक्ष्म विकर्ण हीरे की आकृतियाँ हैं, जो इसे एक आधुनिक और कालातीत आकर्षण प्रदान करती हैं। इसकी खासियत है इसका समृद्ध सुनहरा किनारा जिस पर मायिल (मोर) आकृतियाँ बनी हैं, जो दक्षिण भारतीय विरासत में सुंदरता और शालीनता का प्रतीक है। इसके पल्लू में जटिल चेकर्ड पैटर्न और पारंपरिक तत्व हैं, जो इस साड़ी को शादियों और उत्सवों के लिए आदर्श बनाते हैं।